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बुधवार, 24 अगस्त 2011

राकेश ’चक्र’ का परिचय


राकेश ’चक्र’
अभिलेखों में नाम - राकेश कुमार गुप्त
पिता का नाम -स्व0 धीरज लाल
माता का नाम -स्व0 द्रोपदी देवी
धर्म पत्नी का नाम -श्रीमती रेनू गुप्ता, एम0एस0सी (गणित) बी0एड0
बच्चे -कुमारी अर्चना गुप्ता एम0टैक0, कुमारी धारा गुप्ता बी0टैक0
शिक्षा -स्नातकोत्तर (समाज”शास्त्र), एल.एल.बी, एक्यूप्रेशर एवं योग
जन्म स्थान-ग्राम:- साजाबाद-ताजपुर, पोस्ट जलाली
जिला- अलीगढ़ (उ0प्र0)
जन्म तिथि-14 नवम्बर, 1955)
लेखन प्रारम्भ -1973से, प्रथम कविता ‘‘जन्म सिद्ध अधिकार है‘‘
लखनऊ के स्वतंत्र भारत में प्रकाशित।
प्रेरणास्रोत -पूज्य पिताजी, दयानन्द, महात्मा गांधी, प्रेमचन्द
देश के शहीद, प्रकृति और देश के प्यारे बच्चे।
प्रकाशित प्रौढ़ कृतियाँ
1. चरवाहों का चक्रव्यूह (कविता-संग्रह)(शिल्पायन प्रकाशन दिल्ली) 1998
2. अमावस का अंधेरा (लघुकथा-संग्रह)(निर्मल प्रकाशन, दिल्ली) 2004
3. प्रेम की भाष ही हिन्दुस्तान है (गीतिका-संग्रह)(शिल्पायन दिल्ली) 2004
4. मेरी गजलें मेरा प्यार (गजल-संग्रह)(आत्माराम एण्ड संस का सह प्रकाशन) 2011
5. मेरे देश की थाती (मुक्तछंद कविता-संग्रह) (निर्मल प्रकाशन, दिल्ली)2004
6. फैज (लघुकथा-संग्रह)(प्रियंका प्रकाशन दिल्ली) 2005
7. स्वास्थ्य का रहस्य, पर्यावरण और हम (कुणाल प्रकाशन, दिल्ली)2004
8. आपका स्वास्थ्य, आपके हाथ (आत्माराम एण्ड संस का सह प्रकाशन) 2011
9. वृक्ष और बीज (लघुकथा-संग्रह)(सूयप्रभा प्रकाशन) दिल्ली2011
10.खास रपट-पुलिस अपने आइने में
11.योग शिक्षा व यौन शिक्षा व अन्य ज्वलंत प्रश्न (आर0के0 पब्लिशर्स दिल्ली,)2005
12.एकता के साथ हम (गीत-संग्रह) यतीन्द्र साहित्य सदन, राजस्थान, 2011
13.राकेश चक्र’ की लघु कथाएँ
तथा दर्जनों सम्पादित पुस्तकों में रचनायें संकलित।
प्रकाशित किशोर कृतियाँ
1. आजादी के दीवाने (कथा-संग्रह)(निर्मल प्रकाशन का सह प्रकाशन दिल्ली) 2004
2. कंजूस गोंतालू (बालउपन्यास-संग्रह)(निर्मल प्रकाशन का सह प्रकाशन दिल्ली)2004
3. राकेश ’चक्र’ की श्रे’ठ कहानियाँ (अंगूर प्रकाशन, दिल्ली) 2000
4. तीसरी मां (कथा-संग्रह)(एस0कुमार प्रकाशन दिल्ली) 2005
5.उत्तरांचल की लोककथाएँ (प्रयिंका प्रकाशन, दिल्ली) 2005
6. आओ भारत नया बनाएँ (गीत-संग्रह)
7. वीर सुभा

8. साक्षरता अनमोल रे (गीत-संग्रह) दिल्ली
9.आओ पढ़ लें और पढ़ाएँ (गीत-संग्रह)
१०.सपनों को साकार करेंगे बच्चों के मनोविज्ञान पर श्रे’ठ कृति (आर0के0प0, दि0) 09
11.माटी हिन्दुस्तान की (गीत-संग्रह) (आत्माराम एण्ड संस का सहप्रकाशन) 2011
प्रकाशित बाल कृतियाँ 1. राकेश चक्र’ की एक सौ इक्यावन बाल कवितायें (कुणाल प्रकाशन, दिल्ली) 2005
2. लट्टू-सी ये धरती घूमे (101 बाल कवितायें)( आत्माराम का सह0प्र0, दिल्ली) 2005
3. स्वर-व्यंजन के बालगीत (पाठ्य पुस्तक)
4. धीरे-धीरे गाना बादल (बालगीत-संग्रह)
5. पूरे हिन्दुस्तान से (बालगीत-संग्रह)
6. दयानन्द थे ऋषिवर प्यारे (बालगीत-संग्रह)
7. याद करेगा हिन्दुस्तान (बालगीत-संग्रह) (शिल्पायन का सहप्रकाशन) 2005
8. पौधे रोपें बालगीत-संग्रह)(शिल्पायन का सहप्रकाशन) 2000
9. मेढ़क लाला चक्र निराला (बालगीत-संग्रह) ( शिल्पायन, दिल्ली) 2000
10.बालक, सूरज और संसार (आत्माराम एण्ड संस का सहप्रकाशन) 2011
11.पशु-पक्षियों के मनोरंजक बालगीत (आत्माराम एण्ड संस का सहप्रकाशन, दि0) 011
12. भरत का भारत (बालगीत-संग्रह) (शिल्पायन का सहप्रकाशन) 2000
13.मात्रृभूमि है वीरों की (उत्कृटबालगीत-संग्रह)(आत्माराम एण्ड संस दि0),011
14.मीठी कर लें अपनी बोली (बालगीत-संग्रह) (आत्माराम एण्ड संस सह0प्र0) 2011
15.टीवी और बचपन (बालगीत-संग्रह)
16.मेहनत से तुम डरो न भाई (बालगीत-संग्रह)
17.कसरत नई दिखाती चिड़िया (बालगीत-संग्रह)
18.चाचा कलाम (बालगीत-संग्रह)
19.सात घोड़े (बालगीत-संग्रह)
20.अजब है खेल क्रकिेट (बालगीत-संग्रह)
21.पुच्छल तारे (विज्ञान-लेख) आर0के0 पब्लिकेशन, दिल्ली 2007
22.क्यों गिरती है बिजली (विज्ञान-लेख) आर0के0 पब्लिकेशन, दिल्ली 2007
23.विद्युत तरंगें (विज्ञान-लेख) आर0के0 पब्लिकेशन, दिल्ली 2007
24.अहिंसावादी शोर (कहानी-संग्रह)(शिल्पायन का सह0प्र0) दिल्ली 2000
25.अन्यायी को दण्ड (बालगीत-संग्रह)(शिल्पायन का सह0प्र0) दिल्ली 2002
26.साक्षरता अन्मोल रे (बालगीत-संग्रह)(शिल्पायन का सह0प्र0) दिल्ली 2002
27.बिच्छू वाला दीवान (बालकथा)(शिल्पायन का सहप्रकाशन) दिल्ली 2001
28.रोबोट का आवि’कार (बाल कहानियाँ)(आत्माराम एण्ड संस का सहप्रकाशन) 2009
29.राकेश ’चक’ की बाल मनोरंजक कहानियाँ (आत्माराम एण्ड संस का सह0प्र0) 2009
प्रकाशित शिशु कृतियां 1. साफ हवा कर देते पेड़ (शिशु गीत-संग्रह)
2. वीर शिवाजी (शिशु गीत-संग्रह)
3. ऊँचा देश उठाएँगे (शिशु गीत-संग्रह)
4. था-था- थइया गाएँगे (शिशु गीत-संग्रह)

विधायें छंद व छंदमुक्त काव्य, लघुकथा, कथा, निबन्ध, एवं बाल साहित्य (गद्य एवं पद्य) आदि
उपलब्धियाँ दूरदर्शन व आकाशवाणी से प्रसारण, भारत की विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में हजारों से अधिक लेख, कवितायें, गीतिकायें, गजल कथायें आदि प्रकाशित तथा कई पुरस्कृत। बाल-साहित्य विद्यालयों के पाठ्यक्रमों में सम्मिलित
सम्मान-पुरस्कार

1. साहित्य शारदा मंच खटीमा से ’’साहित्य श्री’’ की उपाधि 2000
2. जैमिनी अकादमी से ‘‘आचार्य की उपाधि 2000
3. केदारखण्ड शोध संस्थान मसूरी से सम्मानित 2001
4. सवहितकारी अग्रवाल अमाज अलीगढ़ द्वारा सम्मानित 2001
5. माथुर वैयसभा मुरादाबाद द्वारा सम्मान 2001
6. साहित्य प्रभा देहरादून द्वारा 2005 का साहित्यप्रभा ज्ञानमाला पुरस्कार व सम्मान 2005
7. वैचारिक क्रान्ति मंच, लखनऊ द्वारा सम्मान 2004
8. अखिल भारतीय साहित्य कला मंच, मुरादाबाद द्वारा श्री लक्ष्मण प्रसाद अग्रवाल बाल साहित्य संवद्धन सम्मान-2005
9. हापुड़ में श्री रतिराम शर्मा स्मृति सम्मान-2006
10.उ0प्र0 कर्मचारी साहित्य संस्थान लखनऊ द्वारा सुमित्रानन्दन पंत पुरस्कार (51,०००/-धनराशि सहित)
11.बाल प्रहरी साहित्य सम्मान, अल्मोड़ा 2010
12.बाल-कल्याण साहित्य परिषद् , कानपुर द्वारा सम्मान एवं पुरस्कार 2010
13.स्व0 पं0 हरप्रसाद पाठ सम्मान एवं पुरस्कार मथुरा 2009
14.स्व0 सूय नारायण स्मृति सम्मान 2010
15.स्व0 ब्रज बहादुर पाण्डेय स्मृति बाल कविता सम्मान 2011
विशेष रूचि एक्यूप्रेशर पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा निशकाम सेवा।
अध्यात्म, पयावरण तथा प्यारे बच्चों का सत्संग एवं यात्रा भ्रमण।
सम्प्रति उत्तरप्रदेश पुलिस (अभिसूचना विभाग) में सेवानिवृत्त
स्थायी सम्पक 90 बी, शिवपुरी (डबल फाटक)
मुरादाबाद - 244001 उत्तर प्रदेश
दूरभा- 9456201857

सोमवार, 27 जून 2011

जल अमृत होता है


चिन्टू भइया रोज़ नहाते
बाथरूम के अन्दर।
उछल-कूद कर खूब नहाते
लगते नटखट बन्दर।।

मम्मी डाँटें पापा डाँटें
नहीं  मानते  वे  हैं।
पानी की किल्लत होने पर
भौंह  तानते  वे  हैं।।
एक  दिवस पूरी टंकी का
खत्म  हुआ  जब  पानी।
बिजली भागी, हुआ अँधेरा  
याद आ गई नानी।।

बूँद-बूँद  को  तरसे  चिन्टू
तनिक न मुँह धो  पाए।
और प्यास के मारे उनके
प्राण  हलक  में  आए।।

 समझ आयी पानी की कीमत
आईं    भूलें   याद।
गलती पर अपनी पछताए
खूब करी फरियाद।।

उसको यह माँ ने समझाया
जल अमृत होता है।
समझ-बूझकर खर्च करें तो
पड़ता कब टोटा है।।
  राकेश चक्र 

गमले घर पर लाएँगे


गमले  घर  पर  लाएँगे।
पौधे   सभी  लगाएँगे।
फू ल  यूँ  मुस्कराएँगे।
सबके  मन  को  भाएँगे।
शुद्ध  हवा को करते हैं,
इनको  आज  बचाएँगे।
जब भी छुट्टी पाएँगे,
पौधें  में  रम  जाएँगे।
घर-घर  को  महकाएँगे।
सारे   बच्चे   गाएँगे।
गमले  घर  पर  लाएँगे।
पौधे    सभी  लगाएँगे।
राकेश चक्र 

फूल लुभाते सबको


फूल लुभाते सबको भाई।
‘छाया’ हो या ‘जग्गू’ भाई।
चले बाग में दोनों हँसकर,
सुमन देख आँखें ललचाई।

इच्छा होती    तोडे़ सबको,
लालच से भरते हैं मन को।
नजर घुमाते इधर-उधर  को, 
पैरों में कपकपी समाई।।
फल लुभाते सबको भाई।।

खिले फूल कहते हैं हँस लो,
हाथों से हमको न मसलो।
दूर-दूर से हमसे रस लो।
कुछ तो जानो पीर पराई।।
फूल लुभाते सबको भाई।।

महक उड़ी फूलों से भाई।
सबको लगती है सुखदाई।
महिमा सबने इनकी गाई।
न करते हैं स्वयं बड़ाई।।
फूल लुभाते सबको भाई।।

फूलों से बच्चों ने जाना,
यह जीवन है सफर सुहाना।
डाल पे हिल-मिल गाते गाना,
आओ मिलकर करें भलाई।।
फूल लुभाते सबको भाई।।
-राकेश चक्र 

पेड़


पीपल, बरगद पेड़ बड़े हैं
सबके   हैं   हितकारी।
अनगिन पंछी मधुर तान में
करते   रोज़   सवारी।।

उनके फल भोजन बन जाते
लगते सबको प्यारे।
चोंच मारकर खाते रहते
मिल-जुलकर के सारे।।

छेर  भी  करते  बैठे-बैठे
पत्ते   हो   रहे   गंदे।
फिर भी पेड़ बुरा नहीं मानें
रोज़    बैठाते   कंधे !
आज जमाना बदल गया है
मिटा रहे आपस का प्यार।
नहीं किसी के काम आ रहे
जैसे पेड़ करें उपकार।।
-राकेश चक्र