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शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2015

पक्षी और बच्चे

पक्षी और बच्चे 
राकेश ‘चक्र’

उपवन के पक्षी हैं सारे ।
जैसे अपने बच्चे सारे ।।

मोर नाचता घूम-घूम कर 
‘चाहा’ गाती झूम-झूम कर 
काँव-काँव कर कौवे बोलें 
डाल-पात पर तोते डोलें
राग-रंग में मन भी झूमा
रंग-बिरंगे पक्षी न्यारे ।।

हवा बह रही है सुखदाई
फूल सुवासित रही नहाई
प्राची से सूरज उग आया
सोना-सा उसने बरसाया
डाल-पात सोने में भीगे
आसमान से उतरे तारे ।।

राकेश ‘चक्र’
90, शिवपुरी, मुरादाबाद
मोबाइल: 09456201857

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